में अपराधी जन्म का, नख शिख भरा विकार तुम दाता दुख भंजना, मेरी करो सम्हार
में अपराधी जन्म का, नख शिख भरा विकार । तुम दाता दुख भंजना, मेरी करो सम्हार ॥ हे सतगुरु साहिब, में कई जन्मों से अपराध करते आया हुँ । मेरा पूरा शरीर विकारों से...

में अपराधी जन्म का, नख शिख भरा विकार ।
तुम दाता दुख भंजना, मेरी करो सम्हार ॥
हे सतगुरु साहिब, में कई जन्मों से अपराध करते आया हुँ । मेरा पूरा शरीर विकारों से भरा हुआ है। हे साहिब आप ही दुखो का नाश करनेवाले हो। आप ही मुझे संभालिये।
Mein Aparadhi Janam Ka, Nakh Shikh Bhara Vikar
Tum Data Dukh Bhanjana, Meri Karo Samhar
I have been committing sins since many births. My whole body is full of vices/disorders. O Satguru Sahib, you are the only one who can destroy all sorrows. You alone can take care of me.
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